Tourism in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश ने घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के मुताबिक, पिछले 365 दिनों में हुए घरेलू ओवरनाइट विजिटर-ट्रिप्स में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.7% रही। इस आंकड़े के साथ यूपी देश में पहले स्थान पर है। तमिलनाडु 13.4% और राजस्थान 8% हिस्सेदारी के साथ इसके बाद रहे। 30 दिन की श्रेणी में भी यूपी आगे सर्वे में पिछले 30 दिनों के दौरान कारोबार, सामाजिक यात्राओं, शिक्षा-प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों से हुई रात्रि यात्राओं को भी शामिल किया गया। इस श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश 15.5% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। बिहार की हिस्सेदारी 10.5% और तमिलनाडु की 9.6% रही। ये आंकड़े राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों को मिलाकर तैयार किए गए हैं। धार्मिक यात्राएं सबसे बड़ी वजह NSO के जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किए गए सर्वे के अनुसार, देशभर में 365 दिनों के दौरान हुई ओवरनाइट यात्राओं में तीर्थ और धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी 48% रही। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह सबसे प्रमुख यात्रा उद्देश्य रहा। यूपी की पहचान लंबे समय से धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर रही है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और चित्रकूट जैसे स्थलों के साथ अब प्रदेश विरासत, प्रकृति, ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक अनुभवों को भी पर्यटन से जोड़ने पर जोर दे रहा है। पर्यटन सर्किट से छोटे शहरों पर फोकस प्रदेश में अलग-अलग पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए थीमैटिक सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा विंध्य क्षेत्र, चित्रकूट, नैमिषारण्य और देवीपाटन जैसे क्षेत्रों में भी पर्यटन विकास की योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। सरकार के अनुसार, 2017 से अब तक प्रदेश में 3,000 से अधिक पर्यटन परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनकी अनुमानित लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये बताई गई है। चित्रकूट और मिर्जापुर में बढ़ी आवाजाही विभागीय आंकड़ों के मुताबिक चित्रकूट में पर्यटकों की संख्या 2024 में करीब 1.18 करोड़ से बढ़कर 2025 में 3.65 करोड़ दर्ज हुई। इसी अवधि में मिर्जापुर में पर्यटकों की संख्या 1.41 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ बताई गई। पर्यटन विस्तार में ग्रामीण क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है। 230 से अधिक चयनित गांवों में होमस्टे, स्थानीय भोजन और पारंपरिक हस्तशिल्प को पर्यटन अनुभव से जोड़ने की पहल की जा रही है। वहीं ईको-टूरिज्म के जरिए प्राकृतिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर आगे लाने का प्रयास है। सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान उत्तर प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को 2026 में एक और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जब सारनाथ को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। 25 जुलाई 2026 को हुई घोषणा के बाद यह भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बनी। प्रदेश में अब अकेले यात्रा करने वाले पर्यटकों और महिला समूहों के लिए भी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ कला, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक आयोजनों को पर्यटन से जोड़ने की योजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। NSO के आंकड़े संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश में घरेलू यात्रा का दायरा केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। कनेक्टिविटी, विरासत, ग्रामीण अनुभव और सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़कर प्रदेश पर्यटन के अलग-अलग आयामों को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। ये भी पढ़ें: SSC-GD परीक्षा में धांधली का ‘Devil’ गिरफ्तार, दिल्ली से STF ने दबोचा, प्रॉक्सी सर्वर से होता था खेल